Waqt status in Hindi

किस शै पे यहाँ वक़्त का साया नही होता इक ख्व़ाब-ए-मोहब्बत है की बूढ़ा नही होता.


वक़्त मेरी तबाही पे हँसता रहा रंग तकदीर क्या क्या बदलती रही.


वक्त से सीखो बदलते रहने का सबक वक्त कभी खुद को बदलते नहीं थकता.


वक्त अर अपने…जब दोनों एक साथ चोट पहुंचाए  तो इंसान बाहर से ही नहीं अन्दर से भी पत्थर बन जाता है.


Jab waqt badal jaata hai  war kamzor se kamzor ka chal jaata hain.


वक़्त को थाम के बैठे हैं हम भी, ज़िद्द है के वो मिले तो हम चले.


वक्त जब भी शिकार करता है चारो तरफ से वार करता है.


तूफानों से कह दो कहीं और दिखाए जलवा अपना, हम तो कब के मर गए, हम पे वक़्त जाया ना करना.


जरा धीरे चल साथिया, वक़्त लगेगा मुझको तुझसे कदम मिलाने में.


वक़्त कोई भी हो मगर, ज़हर-ए-इश्क़ अपना शिकार ढूंढ ही लेता है.


वक्त का खास होना ज़रूरी नहीं खास के लिये वक्त होना ज़रूरी है.


एक हाथ दिल पे रख, एक हाथ से थाम ले वक़्त, जो कर सका तू ये, तो यही जावेदा ज़िन्दगी है.


कौन जाने किस घड़ी लिखी उसने किस्मत हमारी, वक़्त भी रुक गया एक मुकाम के बाद.


बदल जाओ वक्त के साथ या फिर वक्त बदलना सीखो मजबूरियों को मत कोसो, हर हाल में चलना सीखो.


वक़्त की हो धूप या तेज़ हो आँधियाँ कुछ कदमों के निशाँ कभी नहीं खोते जिन्हें याद करके मुस्कुरा दें ये आँखें वो लोग दूर होकर भी दूर नहीं होते.


ए वक्त जरा ठहर कोई मसवरा दे दो जलने वाले को थोड़ी सी हवा दे दो.


समय के साथ चलने से,समय जीना सिखाता है अकड़ कर चलनेवालों का, घमंड टूट जाता है कहानी चार दिन की है, जमाना भूल जाता है सिर्फ अपनों को ही, गुजरा जमाना याद आता है.


ना डरा मुझे ऐ वक़्त.. नाकाम होगी तेरी हर कोशिशे ज़िन्दगी के मैदान में खड़ा हूँ,, दुआओं का काफिला लेकर.


खफा हूँ उस वक़्त से, जो कुछ पल के लिए आया था रास्ते भटकाने को और एहसानमंद हूँ उस वक़्त का, जिसने समय रहते संभाल लिया.


Jab bura waqt aata hai na  insaan ko apne kadh se uncha sochna chahiye.


महँगी से महँगी घड़ी पहन कर देख ली वक़्त फिर भी मेरे हिसाब से कभी ना चला.


Jb aadmi ka waqt bura aata h to chahe wo unth pe hi kyu na behta ho fir b kutta usse kaat leta h.


बस जरा सा दर्द है टूटने का वक्त के साथ गुजर जाएगा फिक्र है किसी के रूठने की उसे कौन मनाएगा.


ऐ वक्त ! अब मुझे तेरा इंतजार न रहा न जाने हवाएं आज भी दरवाजे क्यूँ खोल देती है.


वक्त ने वक्त के पहले ही सिखाई मुझे दुनियादारी हँसते रहो गम हो कितना ही दिखे न किसी को लाचारी.


कपड़े अर चेहरे अक्सर झूठ बोला करते हैं  इंसान की असलियत तो वक़्त बताता है.